भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष (BNN) का विकास महार्षि भृगु और महर्षि नंदी के द्वारा किया गया। नाड़ी ज्योतिष का आधार वैदिक ज्योतिष को ही बनाया गया है लेकिन नाड़ी ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष के सूत्रों पर फलित नही करती बल्कि केवल ग्रहों के कारक तत्वों को आधार बनाकर फलित करती है। इसीलिए भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष बहुत ही सरल है। वैदिक ज्योतिष में फलित करने के लिए अत्याधिक गणनाओं को किया जाता है।
भृगुनंदी नाड़ी और वैदिक ज्योतिष
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष में केवल लग्न कुण्डली को देखा जाता है। वैदिक ज्योतिष में शोडष वर्ग कुण्डलीयां भी देखी जाती हैं। लग्न कुण्डली को भी काल पुरुष की कुण्डली में देखते है। जातक के लग्न राशि का महत्व नहीं होता वल्कि पहले घर को मेष राशि मानकर ही फलित किया जाता है, ना की जातक ही लग्न राशि को आधार बनाकर। इस प्रकार भृगु नंदी नाड़ी में राशि को फलित का आधार नहीं बनाया जाता।
भृगुनंदी नाड़ी में फलित कैसे करते हैं
अतः भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष में फतिल काल पुरुष की कुण्डली के घर के कारक तत्वों और ग्रहों के कारक तत्वों को आधार बना कर किया जाता है। जैसे मान ले किसी कुण्डली में कन्या लग्न है। जैसा की उदाहरण फोटो में दिखाया गया है। कन्या राशि में शुक्र और सूर्य ग्रह बैठे है। तुला में बु्द्ध और मंगल बैठे हैं। कुंभ में राहु बैठा है। मीन में शनि देव बैठे हैं। मिथुन में चंद्रमा और गुरू बैठे है। सिंह में केतु बैठा है।

तो इस कुण्डली में भले ही पहले घर में कन्या राशि के शुक्र और सूर्य हो लेकिन भृगुनंदी नाड़ी में मेष लग्न के पहले घर में शुक्र और सुर्य मान कर फलित किया जायेगा। इसी प्रकार बृषभ राशि व दूसरे घर के बुद्ध और मंगल का फलित होगा। कन्या राशि व छठे घर में राहु का फतित होगा। तुला राशि व सातवें घर में शनि का फतिल होगा। मकर राशि व दसवें घर में चन्द्रमा और गुरू का फलित होगा। मीन राशि व बारहवें घर में केतु का फलित होगा।
भृगुनंदी नाड़ी में घरों का महत्व
इस प्रकार जातक की कुण्डली में लग्न का नहीं वल्कि घर का महत्व है। कुंडली के जिस घर में जो ग्रह बैठेगा वह वहीं के फल देगा। इसी कारण भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिष में गणना करने की आवश्यकता ही नहीं होती। सीधा देख कर ही फलित किया जा सकता है।
भृगुनंदी नाड़ी किस ग्रह से सम्बन्धित है
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष एक गणना का विज्ञान नहीं है बल्कि एक फलित करने की कला है। इस लिए शुक्र ग्रह से देखा जाता है। जिसका अर्थ है कि फलित करने समय कोई दुविधा नहीं होती बल्कि स्पष्टता रहती है। केवल समर्पण की आवश्यकता होती है। इस ज्योतिष को सीखने वाले व्यक्ति में ज्योतिष के प्रति समर्पण अति आवश्यक होता है। इस लिए भृगु नंदी नाड़़ी ज्योतिष को सीखने वाले विद्यार्थी का शुक्र ग्रह अच्छा होना चाहिए तभी वह व्यक्ति सही से फलित कर पायेगा।
दूसरा सबसे महत्वपूर्ण ग्रह केतु है यदि ज्योतिष के साधक का केतु अच्छा होगा (अर्थात् केतु साधक की कुण्डली में सक्रिय हो और अच्छे परिणाम दे रहा हो) तो साधक जातक के कुण्डली में जातक की समस्या को आसानी से देख लेगा। और उसका समाधान भी कर पायोगा।
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष में पारंगत कैसे बने
इस प्रकार यदि कोई विद्यार्थी भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष में पारंगत होना चाहता है तो उसे ग्रहों के कारक तत्वों को विस्तार से समझना होगा। उसे जातक की अवस्था के अनुसार वर्णन करना सीखना होगा। साथ की किस आयु वर्ग के जातक के लिए कौन का कारक तत्व सक्रिय होगा यह भी सझना होगा। अतः स्पष्ट है की ज्योतिष की साधना करनी होगी। ज्योतिष एक कौशल कला है जिसका जितना ज्यादा अभ्यास किया जायेगा उतनी ही प्रवीणता आयेगी। इसलिए ज्योतिष के साधक की साधना कभी भी समाप्त नहीं होती। वास्तव में ज्योतिष एक जन्म का विषय नहीं है यह तो कई जन्मों की साधना है।
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष में पारंगत होने के लिए दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कालपुरुष की कुण्डली के अनुसार सभी 12 घरों का विस्तार से जानकारी होनी चाहिए।
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष एक फलित ज्योतिष के रूप में
भृगुनंदी नाड़ी फलित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिष विधा है। इस में फलित बहुत सटीक होता है। जातक को उसके सवालो का जवाब आसानी से स्पष्ट रूप से प्राप्त हो जाते हैं। क्योकि भृगुनंदी नाड़ी में गणना के स्थान पर युतियों पर ज्यादा महत्व दिया जाता है। और केवल लग्न कुण्डली से ही फलित किया जाता है इसकारण सरलता भी रहती है।
निष्कर्ष
भृगुनंदी नाड़ी ज्योतिष (BNN) वस्तुतः एक सरल और लग्न चार्ट आधारित फलित ज्योतिष की विधा है। जो नाड़ी ज्योतिष की एक विधा है। वर्तमान समय में भृगुनंदी नाड़ी की तरफ ज्योतिषियों की रुचि बढ़ी है। ज्योतिष के क्षेत्र में आज फलित का महत्व बढ़ता जा रहा है। ज्योतिषियों के सामने लोग अपनी समस्या लेकर आते है उन्हें तुरंत और सटीक समाधान चाहिये होता है इस कार्य के लिए भृगुनंदी नाड़ी बहुत उपयोगी होती है।
